मौत के चंद घंटों पहले आखिर क्या हुआ था बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या भारती के साथ

मौत के चंद घंटों पहले आखिर क्या हुआ था बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या भारती के साथ


महज १४ साल की उम्र में एक लड़की बॉलीवुड में आती है। साल १९९२ में उनकी पहली फिल्म आती है और साल १९९३ आते-आते वो १४ फिल्मों में काम कर लेती है। जिस अभिनेत्री ने अपने करियर की शुरुवात की थी आयशा जुल्का और पूजा भट्ट जैसी अभिनेत्रियों के साथ उसी अभिनेत्री की कुछ फ़िल्में करने के बाद श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी अभिनेत्रियों से तुलना की जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं उन्हें तो श्रीदेवी की कॉपी भी कहा जाता था। आज हम बात कर रहे है फ़िल्मी दुनिया की खूबसूरत अभिनेत्री दिव्या भारती की।

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२५ फरवरी १९७४ में जन्मी दिव्या भारती के पिता ओम प्रकाश भारती एक इंस्युरेन्स अफसर और मां मीता भारती एक गृहणी थी। दिव्या के साथ एक छोटा भाई कुणाल और सौतेली बहन पूनम भी थी। अभिनेत्री कायनात अरोरा उनकी कजिन है। दिव्या ने अपनी पढ़ाई मुंबई के जुहू इलाके में 'मानेकजी कूपर हाई स्कूल' में की है। फिल्मों में इंटरेस्ट रखने वाली दिव्या ने सिर्फ नौवीं क्लास तक की ही पढ़ाई की और खूबसूरत होने की वजह से उन्हें इसी समय से फिल्मों के ऑफर आने शुरू हो गए थे।

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साल १९८८ में दिव्या भारती को फिल्म का ऑफर देने वाले सबसे पहले निर्माता नंदू तोलानी ने दिया था। नंदू तोलानी, दिव्या को अपनी फिल्म 'गुनाहों के देवता' में लेना चाहते थे। क्यूंकि दिव्या उम्र में काफी छोटी थी तो माता-पिता ने उन्हें सपोर्ट नहीं किया और इस फिल्म में उन्होंने काम नहीं किया। इसके बाद निर्देशक दिलीप शंकर ने दिव्या को अपनी फिल्म का ऑफर दिया जिसमें उनके साथ आमिर खान काम करने वाले थे।

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ऐसे ही निर्माता-निर्देशक और गोविंदा के भाई कीर्ति कुमार ने एक वीडियो लायब्रेरी में दिव्या का वीडियो देखा और उन्होंने दिव्या को अपनी फिल्म 'राधा का संगम' में लेने का फैसला कर लिया। कुमार चाहते थे कि वो अपनी फिल्म में दिव्या को गोविंदा के साथ लॉच करें और इसी के चलते उन्होंने निर्देशक दिलीप शंकर से बात करके दिव्या के आमिर खान वाली फिल्म के करार को रद्द करा दिया।

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दिव्या भारती ने इसके बाद कीर्ति कुमार की फिल्म 'राधा का संगम' के लिए करीब महीनों तक डांस और एक्टिंग की तैयारियां की। मगर एक दिन दिव्या को पता चलता है कि फिल्म 'राधा का संगम' का मुहूर्त कर लिया गया है उनकी जगह फिल्म में जूही चावला को ले लिया गया है। बाद में कीर्ति कुमार ने इसका कारण ये बताया था कि दिव्या भारती छोटी उम्र की वजह से बचकाना हरकतें करती थी और वो प्रोफ़ेशनल नहीं थी।

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फिल्म 'राधा का संगम' के छूटने के बाद दिव्या भारती को निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर की फिल्म 'प्रेम' से भी निकाल दिया गया, जिसकी करीब ८ दिनों की शूटिंग भी वो पूरी कर चुकी थी। इतना ही नहीं निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने भी अपनी फिल्म 'सौदागर' से दिव्या भारती को हटाकर मनीषा कोइराला को ले लिया।

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वही दिव्या भारती जिन्हें फिल्मों में आने से पहले ही मशहूर हो गयी, जिन्हें बड़े-बड़े फिल्म मेकर्स ने साइन कर लिया, जिन्हें श्रीदेवी की दूसरी कॉपी कहा जाता रहा और जिन्होंने एक्टिंग के लिए अपनी पढ़ाई भी छोड़ दी थी, अब उनके पास एक भी फिल्म नहीं थी। इन सबकी वजह से दिव्या भारती डिप्रेशन में चली गयी थी और इसी कारण उनकी मां उन्हें घुमाने के लिए कश्मीर ले गयी थी। घूमने के दौरान ही दिव्या को एक साउथ के निर्देशक का फ़ोन आया जो उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहते थे।

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दिव्या ने बिना कुछ सोचे यह फिल्म साइन कर ली। इस फिल्म का नाम 'बोबली राजा' जिसका निर्देशक डी रामानायडू ने किया था और फिल्म में दिव्या भारती के साथ थे सुपरस्टार वेंकटेश। यह फिल्म आज भी तेलगु फिल्मों की सबसे पॉपुलर फिल्म में गिनी जाती है। इसी फिल्म ने दिव्या को वो रौनक दी जो दिव्या बॉलीवुड में ढूंढ रही थी।

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इसके बाद दिव्या को साउथ की कई फिल्मों के ऑफर आने लगे और महज १६ साल उम्र में ही उन्होंने साउथ के सुपरस्टार मोहन बाबू और चिरंजीवी के साथ भी फ़िल्में कर ली। फिर साउथ में मशहूर हुई दिव्या भारती को बॉलीवुड में आने के ज्यादा समय नहीं लगा। उनके मशहूर होने की खबर निर्माता-निर्देशक राजीव राय के कानों तक पहुंची और उन्होंने दिव्या को अपनी फिल्म 'विश्वात्मा' के लिए साइन कर लिया।

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फिल्म 'विश्वात्मा' के गीत 'सात समुन्दर पार' ने दिव्या को बॉलीवुड में भी मशहूर कर दिया। अब उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिल गया और बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ काम करने का उन्हें ऑफर भी मिलने लगा। 'विश्वात्मा' के बाद 'शोला और शबनम', 'दिल का क्या कसूर', 'जान से प्यारा', 'दीवाना', 'दिल आशना है' और 'गीत' जैसी कई सफल फिल्मों ने दिव्या भारती को एक सफल अभिनेत्री बना दिया था।

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फिल्म 'शोला और शबनम' की शूटिंग के दौरान गोविंदा ने उन्हें निर्माता-निर्देशक साजिद नाडियाडवाला से मुलाक़ात करवाई थी। ये मुलाकात दोस्ती में बदल गयी और दोनों में प्यार हो गया, जिसके बाद इन दोनों ने १० मई १९९२ के दिन शादी कर ली। साजिद के साथ शादी करके दिव्या, मुंबई के वर्सोवा इलाके में तुलसी बिल्डिंग में रहने लगी थी और मशहूर वेबसाइट 'विकिपीडिया' के मुताबिक दिव्या ने इस्लाम कबूल करके अपना नाम 'सना नाडियाडवाला' रख लिया था।

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कुछ समय तक उन्होंने अपनी शादी की बात को छुपाकर भी रखा था। सबकुछ ठीक ही चल रहा था कि अचानक उनके बारे में कई नेगेटिव ख़बरें भी मीडिया में आने लगी। इन ख़बरों के मुताबिक पिता उनकी शादी से खुश नहीं थे।

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अपनी मौत वाले दिन ही दिव्या ने मुंबई में ही अपने लिए नया ४ बीएचके का घर ख़रीदा था और डील फाइनल की थी। दिव्या ने ये खुशखबरी अपने भाई कुणाल को भी दी थी, जो दिव्या के काफी करीब था। बता दें कि उसी दिन दिव्या चेन्नई से अपनी शूटिंग ख़त्म करके मुंबई लौटी थी।

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५ अप्रैल १९९३ की रात के करीब १० बजे जब मुंबई के पश्चिम अंधेरी में तुलसी अपार्टमेंट वाले घर पर दिव्या के घर उनकी दोस्त और डिजाइनर नीता लुल्ला अपने पति के साथ उनसे मिलने आयी हुई थी। दिव्या भारती के लिए ये दिन सबसे अच्छा दिन था, उन्होंने अपने लिए अपना एक घर ख़रीदा था और यही कारण था कि वह अपने दोस्तों के साथ छोटी सी पार्टी करना चाहती थी, जिसकी वजह से ही शराब का दौर चला और तीनों दोस्त लीविंग रूम में बैठकर बातें कर रहे थे।

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करीब ११ बजे दिव्या का कई सालों से ख्याल रखने वाली उनकी नौकरानी अमृता किचन में कुछ काम करने गयी और नीता अपने पति के साथ टीवी देखने में व्यस्त थी। इसी वक़्त दिव्या किचन की खिड़की की तरफ गयी और वहीँ से तेज आवाज में अपनी नौकरानी से बातें कर रही थी। दिव्या के लिविंग रूम में कोई बालकनी नहीं थी लेकिन ये एकलौती ऐसी खिड़की थी जिसमें ग्रिल नहीं लगी हुई थी। इस खिड़की के ठीक नीचे पार्किंग की जगह थी जहां अक्सर कई गाड़ियां पार्किंग में खड़ी रहती थी। मगर उस दिन वहां कोई गाड़ी नहीं थी।

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दिव्या भारती बालकनी में जाकर बैठी थी। उनसे जुड़े लोग बताते है कि वो अक्सर ऐसा किया करती थी। दिव्या के हाथों में शराब का गिलास था। घर की नौकरानी अमृता शराब के साथ खाने के लिए कुछ बना रही थी और नीता व उनके पति वीडियो प्लेयर की सेटिंग कर रहे थे। तभी जोर से आवाज़ हुई और सभी लोग दौड़कर खिड़की पर पहुंचे तो देखा कि नीचे दिव्या पड़ी तड़प रही है।

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पांचवे माले से गिरने के कारण दिव्या पूरी तरह से खून में लतपत थी और उनकी सांसें चल रही थी। उन्हें नजदीक के कूपर अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और दिव्या ने अस्पताल के इमर्जेन्सी वार्ड में ही अपना दम तोड़ दिया था। ७ अप्रैल १९९३ के दिन दिव्या भारती को दुल्हन के तरह सजाकर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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करीब ५ साल तक तहकीकात करने के बाद पुलिस को दिव्या की मौत की कई ठोस वजह नहीं पता चल पायी। जिसके चलते रिपोर्ट में नशे में बालकनी से गिरने को ही कारण बताया गया। आख़िरकार ये पता ही नहीं चल पाया कि दिव्या की मौत हत्या थी की आत्महत्या? अगर वो दुखी थी तो अपने लिए घर क्यों ख़रीदा? क्या वाकई उनके पति की कोई साजिश थी? जब वे बिना ग्रिल वाली खिड़की पर बैठी तो उन्हें किसी ने रोका क्यों नहीं? ये सारे सवालों का जवाब आज तक नहीं मिल पाया है। तीन साल के इस छोटे से फ़िल्मी सफर में दिव्या भारती ने वो सबकुछ देख लिया जो एक इंसान अपनी पूरी जिंदगी में देख पाता। दिव्या भारती की ख़ूबसूरती और उनकी यादें आज भी हमारे दिल में है।

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