एक जूस विक्रेता से म्यूजिक किंग बने गुलशन कुमार की ऐसे की गयी थी दर्दनाक हत्या

एक जूस विक्रेता से म्यूजिक किंग बने गुलशन कुमार की ऐसे की गयी थी दर्दनाक हत्या


दोस्तों, अगर फर्श से अर्श की बात की जाय तो जिस तरह से इन्होंने सफलता पायी है शायद ही बॉलीवुड में किसी को ऐसी सफलता नसीब हुई होगी। ये बॉलीवुड में आज सबसे बड़ा नाम रखते है और जितने बड़े ये थे उनसे कई ज्यादा बड़ा इनका दिल था। अक्सर जहां पैसा आने के बाद इंसान खुद के बारे में सोचता है और खुद के परिवार के बारे में सोचता है। वही जब इनके पास दौलत आयी तो इन्होंने उन लोगों की मदद की जिनका कोई नहीं है। जी हां, आज हम बात कर रहे है उस धर्मात्मा इंसान की जिनका नाम है गुलशन कुमार। हर कोई ये जानता है कि गुलशन कुमार एक बड़े धर्मात्मा इंसान थे, मगर एक समय ऐसा भी आया कि इनका संपर्क बुरे लोगों के साथ हुआ।

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५ मई १९५६ के दिन दिल्ली में जन्मे गुलशन कुमार बचपन में अपने पिता चंद्रभान कुमार दुआ के साथ उनकी जूस की दूकान में बैठा करते थे। इसके बाद उनके पिता ने एक बड़ी दुकान ले ली, जहां वो ऑडियो कैसेट और टेप रिकॉर्डर ठीक करने का काम करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने कैसेट बेचने का काम भी शुरू किया और टेप रिकॉर्डर भी बेचने लगे।

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जिस दौरान वो कैसेट्स बेचा करते थे तभी उन्हें ये आईडिया आया कि क्यों न वो भी म्यूजिक रिकॉर्ड करके खुद की कैसेट्स बनाये। इसके बाद गुलशन कुमार ऐसी जगहों पर जाने लगे जहां पर भजन और पूजा-पाठ समारोह हुआ करते थे और वहां पर वो कैसेट रिकॉर्ड किया करते थे। उस समय आमतौर पर मार्किट में कैसेट करीब ३० रुपये में बिका करती थी तो गुलशन कुमार अपनी कैसेट महज १० रुपये में बेचा करते थे। धीरे-धीरे उनका मुनाफा इतना बढ़ गया कि दिल्ली में उन्होंने अपना खुद का स्टूडियो भी बनवा लिया। जिसका नाम उन्होंने 'सुपर कैसेट इंडस्ट्री' रखा।

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पूजा-पाठ के गाने करते हुए गुलशन कुमार के साथ और भी गायक जुड़ने लगे और नए-नए कैसेट बनाने का सिलसिला चलता रहा। अब गुलशन कुमार का स्टूडियो उस मक़ाम पर पहुँच गया था कि धार्मिक कैसेट्स के मार्केट में वो नंबर वन बन चुके थे। इसके बाद उन्होंने तय किया कि अब धार्मिक गानों से बॉलीवुड के गानों की तरफ अपना रुख किया जाए और इसके लिए वो दिल्ली से मुंबई आ गए।

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मुंबई आने के बाद संगीत से जुडी हस्तियों से गुलशन कुमार ने मिलना-जुलना शुरू किया और तभी इनके संपर्क में अनुराधा पौडवाल, नदीम-श्रवण, कुमार सानू, उदित नारायण और सोनू निगम जैसे गायक। फिल्म इंडस्ट्री में इन्होंने शुरुवात की 'लाल दुपट्टा मल मल का' एल्बम से, जिस पर एक फिल्म भी बनाई गयी थी। इसके बाद 'टी सीरीज' ने फिल्मों में गाने देना शुरू किया, जिसमें उन्हें अच्छी-खासी कामयाबी भी मिली।

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इसके बाद फिल्म 'क़यामत से क़यामत तक', 'दिल है के मानता नहीं', 'आशिकी', 'सड़क' और 'जीना तेरी गली में' के गानों से 'टी सीरीज' ने बॉलीवुड म्यूजिक की परिभाषा ही बदलकर रख दी। फिल्म आशिकी के बाद तो गुलशन कुमार के साथ नदीम-श्रवण के संगीत को बेमिसाल मान लिया गया। ऐसा माना जाने लगा कि अगर फिल्म सफल करनी है तो गुलशन कुमार और नदीम-श्रवण की टीम बिलकुल सही रहेगी। माहौल ऐसा था कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में करीब ६५ प्रतिशत का मार्किट शेयर टी सीरीज के पास था। इसी वजह से ज्यादा से ज्यादा निर्माता चाहते थे कि उनके गानों को सिर्फ और सिर्फ टी सीरीज ही खरीदें।

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फिल्म आशिकी के गानों से बहुत ज्यादा चर्चा में आने वाले संगीतकार नदीम-श्रवण का इसके बाद एक एल्बम निकला जिसका नाम था 'हाय जिंदगी'। इस एल्बम में खुद नदीम ने ४ गाने गाये थे और उन्होंने अपने दोस्त गुलशन कुमार से अपनी इस एल्बम को प्रमोट करने के लिए कहा था। सफलता की शुरुवात से साथ में रहे नदीम-श्रवण की दोस्ती की खातिर गुलशन कुमार ने उनके इस एल्बम को प्रमोट करने के लिए हामी भर दी।

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नदीम, जिन्होंने इस एल्बम के लिए ४ गाने खुद गाये थे, वो संगीतकार तो अच्छे थे, मगर गायक इतने अच्छे नहीं थे। यही कारण है कि गुलशन कुमार के प्रमोट करने बावजूद उनका ये एल्बम पीट गया। इसके बावजूद नदीम ने एक और गाना गाया और इस गाने को भी गुलशन कुमार को प्रमोट करने के लिए कहा।

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इस बार गुलशन कुमार ने इस गाने को प्रमोट करने से साफ़ इनकार कर दिया और साफ़-साफ़ कह दिया कि ये गाने इतने अच्छे नहीं है और वो इन्हें प्रमोट नहीं कर सकते है। बस इसी कारणवश इन दोनों के बीच में तनाव बढ़ने लगे। इधर नदीम-श्रवण ने दूसरी कम्पनी के साथ काम करना शुरू कर दिया और गुलशन कुमार का मार्केट शेयर ६५ प्रतिशत होने की वजह से संगीतकारों और गायकों की कोई कमी नहीं खली और उन्होंने भी नए संगीतकारों और गायकों के साथ काम करना शुरू कर दिया।

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ये बात साल १९९६ के समय की है तब बॉलीवुड कहें या पूरी फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग अंडरवर्ल्ड के दबाव में आकर काम किया करते थे। अंडरवर्ल्ड द्वारा कई बड़े सितारों से या निर्माताओं से जबरन पैसे वसूली किया करते थे। गुलशन कुमार को भी ऐसे ही एक बार फ़ोन आया उनसे पैसे मांगे गए। पहली दफा था और गुलशन कुमार अपने व्यवसाय में रूकावट नहीं चाहते थे इसीलिए उन्होंने अंडरवर्ल्ड के दबाव में आकर पैसे दे दिए थे, जो कि कहा जाता है करोड़ों में थी।

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नदीम-श्रवण की जोड़ी जो गुलशन कुमार से अलग हो चुके थे, उनमें से नदीम ने अपने अंडरवर्ल्ड के दोस्तों से बात करना शुरू कर दिया और उनसे कहने लगे कि जिन फिल्मों में हम गाने देते है गुलशन कुमार उन गानों को प्रमोट ही नहीं कर रहे है और यहां तक कि गुलशन कुमार ने हमें काम देने से भी मना कर दिया है। नदीम ने ये सारी बातें अपने अंडरवर्ल्ड दोस्त अबू सलेम और अनीस इब्राहिम (दावूद इब्राहिम का छोटा भाई) से कही। इसके बाद अबू सलेम ने गुलशन कुमार को फ़ोन करके धमकी दी थी कि अगर अपनी सलामती चाहते हो तो १० करोड़ दो।

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इस बार फ़ोन आने पर गुलशन कुमार ने ये सारी बातें अपने छोटे भाई किशन कुमार से कही और बताया कि उन्हें अंडरवर्ल्ड से धमकी वाले फ़ोन आ रहे है। किशन कुमार ने उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज करने की सलाह दी, मगर गुलशन कुमार ने इसके लिए ये कहकर मना कर दिया कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो वो सीधे-सीधे अंडरवर्ल्ड के दुश्मन बन जाएंगे और आगे व्यापार में दिकत्ते आने लगेगी। इसी वजह से गुलशन कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की।

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दो बार फ़ोन करने के बावजूद जब अबू सलेम के पास वसूली के पैसे नहीं पहुंचे तब तीसरी बार ८ अगस्त के दिन अबू सलेम ने गुलशन कुमार को फ़ोन किया। उस दिन उनके साथ उनके भाई किशन कुमार भी मौजूद थे। अबू सलेम ने गुलशन कुमार से कहा कि 'लगता है तुम हमारी बात को सीरियस नहीं ले रहे हो। तुम्हें अपनी जान की परवाह नहीं है।' और ये भी कहा कि 'देखों, ये सारी चीजें यहीं की यहीं रह जाएगी, सलामत रहना है तो १० करोड़ भिजवा दो।'

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अबू सलेम को उम्मीद थी कि इस बार तो गुलशन कुमार दबाव में आ ही जाएंगे। लेकिन, हुआ इसका बिलकुल उल्टा। अबू सलेम की धमकी का जवाब देते हुए गुलशन कुमार ने कहा कि 'तुम्हें पैसा दूं, इससे अच्छा तो मैं गरीबों को खाना खिलाऊं। अपने भंडारों में पैसा दूं, मंदिर बनवाऊं, लोगों की मदद करूं। मैं तुम्हें पैसा नहीं देने वाला हूं।'

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सब जानते है है कि गुलशन कुमार भगवान के भक्त है। वो हर रोज मंदिर जाना पसंद करते थे। उनके घर के करीब जीतेश्वर शंकर मंदिर में तो वो रोज जाया करते थे। जब भी गुलशन कुमार मुंबई में हुआ करते थे तो सुबह और शाम दिन में दो बार वो इस मंदिर में जाया करते थे। इस मंदिर को छोटे से बड़े मंदिर में तब्दील करने में गुलशन कुमार की आस्था जिम्मेदार थी।

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१२ अगस्त की सुबह हर रोज की तरह गुलशन कुमार अपने घर से मंदिर की तरफ निकले थे। मंदिर में दर्शन के लिए वो हमेशा टी सीरीज के मालिक के हैसियत से नहीं बल्कि एक आम आदमी की तरह जाया करते थे और इसी वजह से वो अपने साथ कभी भी अपने बॉडीगार्ड नहीं लेकर जाया करते थे। सुबह के १० बजकर १० मिनिट पर गुलशन कुमार ने मंदिर में अपनी पूजा ख़त्म करके वापस घर की तरफ बढ़ते है।

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जैसे ही गुलशन कुमार मंदिर से बाहर आते है तो देखते है कि तीन आदमी हाथ में गन लिए खड़े हुए है। गुलशन कुमार कहते है कि 'ये क्या कर रहे हो?' तो उनमें से एक आदमी कहता है कि 'यहां मंदिर में बहुत पूजा हो गयी, अब ऊपर जाकर पूजा करना।' इसके बाद तीनों आदमियों ने एक के बाद एक १६ गोलियां गुलशन कुमार के शरीर पर चलायी और उन्हें खून से लतपत कर दिया। उनके मरने तक शूटर ने अपना फ़ोन चालू रखा था ताकि गुलशन कुमार की चीख अबू सलेम सुन सके।

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गुलशन कुमार की मौत के बाद उनके बेटे भूषण कुमार के कम उम्र का होने की वजह से उनके भाई किशन कुमार ने सारे बिज़नेस को बड़ी ईमानदारी से चलाया और भूषण कुमार के बड़े होने पर उनके पिता की सारी सम्पति समेत सारा बिज़नेस उन्हें वापस कर दिया। आज टी सीरीज सिर्फ म्यूजिक में ही नहीं बल्कि फिल्म प्रोडक्शन में भी एक बड़ा नाम रखते है। इंटरनेट की दुनिया में यूट्यूब के माध्यम से आज टी सीरीज दुनिया का नंबर वन चैनल है और बॉलीवुड की नंबर वन कंपनी भी है।

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दोस्तों, एक जूस की दूकान से दुनिया की नंबर वन म्यूजिक इंडस्ट्री कंपनी खड़ी की जा सकती है ये गुलशन कुमार ने बखूबी साबित किया है। आपका क्या कहना है कृपया कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइयेगा और जानकारी अच्छी लगे तो कृपया इसे लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा।
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