बिग बी ने लिखा- जिस डॉक्टर की निगरानी में कोविड पेशेंट का इलाज चलता है, वह कभी करीब नहीं आता

बिग बी ने लिखा- जिस डॉक्टर की निगरानी में कोविड पेशेंट का इलाज चलता है, वह कभी करीब नहीं आता


कोविड-19 का इलाज करा रहे अमिताभ बच्चन नानावटी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में 15 दिन बिता चुके हैं। उन्होंने अपना ताजा ब्लॉग इसी वार्ड को लेकर लिखा है। शुरुआत में अपना हाल बयां करते हुए वे हैं- रात के अंधेरे में और कोल्ड रूम की कपकपाहट में मैं गाने गाता हूं। नींद लगाने के लिए आंखें बंद करने की कोशिश करता हूं। आसपास कोई नहीं होता है। इसके आगे बिग बी ने आइसोलेशन वार्ड का अनुभव साझ किया और बताया कि मरीज पर इसका बहुत बड़ा मानसिक प्रभाव पड़ता है।

'डॉक्टर्स और नर्स की मौजूदगी रोबोटिक होती है'

अमिताभ ने लिखा है कि कोविड के इलाज के दौरान हफ्तों तक मरीज को कोई और इंसान देखने को नहीं मिलता। वे लिखते हैं- यहां मेडिसिन केयर के लिए नर्स और डॉक्टर्स आते हैं। लेकिन वे पीपीई यूनिट्स में दिखाई देते हैं। आपको कभी पता नहीं चलता कि वे कौन हैं?

आप उनकी विशेषता और हाव-भाव कभी नहीं जान पाते, क्योंकि वे सुरक्षा के लिए लिहाज से यूनिट्स में होते हैं। उनकी मौजूदगी रोबोटिक होती है। उन्हें जो निर्देश दिया जाता है, वे वह करते हैं और चले जाते हैं। चले इसलिए जाते हैं , क्योंकि ज्यादा देर तक रुकने में उन्हें कंटेमिनेशन का डर रहता है।

'निगरानी करने वाला डॉक्टर कभी करीब नहीं आता'

अमिताभ के मुताबिक, जिस डॉक्टर की निगरानी में कोविड मरीज का इलाज चल रहा होता है, वह कभी उसके करीब नहीं आता और न ही कोई आश्वासन देता है। वे लिखते हैं- डॉक्टर्स फेसटाइम के जरिए मरीज से मिलते हैं।"

ताजा माहौल के हिसाब से यह भी सही है। लेकिन क्या इसका मानसिक असर पड़ता है? मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि हां पड़ता है। डिस्चार्ज होने के बाद मरीजों को गुस्सा आता है। उन्हें प्रोफेशनल माइंड टॉकर्स से परामर्श मिलता है।

वे बाहर जाने में डरने लगते हैं या उन्हें आशंका होती है कि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाएगा। उन्हें डर होता है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा, जैसे वे बीमारी को साथ लेकर चल रहे हैं। यह एक पैरिया (छुआछूत) सिंड्रोम है, जो उन्हें उस डिप्रेशन और अकेलेपन में ले जाता है, जिससे वे अभी-अभी बाहर आए हैं।

'चिकित्सा क्षेत्र इतना विकलांग कभी नहीं रहा'

बिग बी की मानें तो बीमारी भले ही आपके सिस्टम से चली जाती है, लेकिन 3-4 सप्ताह तक हल्के बुखार के मामलों को कभी खारिज नहीं किया जाता। वे लिखते हैं- इसका लंबा और छोटा असर यह है कि दुनिया को इस बीमारी की कोई फुल प्रूफ पद्धति नहीं मिली है। हर मामला अलग है। हर दिन एक नया लक्षण ऑब्जरवेशन और रिसर्च के तहत है। इससे पहले चिकित्सा क्षेत्र इतना विकलांग कभी नहीं रहा। सिर्फ एक या दो क्षेत्र में नहीं...बल्कि पूरे यूनिवर्स में। ट्रायल और एरर पहले कभी इतनी डिमांड में नहीं थे।

11 जुलाई को भर्ती हुए थे अमिताभ

77 साल के अमिताभ और उनके 44 वर्षीय बेटे अभिषेक 11 जुलाई से अस्पताल में भर्ती हैं। बिग बी की 46 साल की बहू ऐश्वर्या राय और 8 साल की पोती आराध्या बच्चन भी कोरोना से संक्रमित हैं। दोनों को 17 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन या बच्चन परिवार की ओर से यह जानकारी अभी भी तक सामने नहीं आई है कि वे कितने दिन और अस्पताल में ही रहेंगे।

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अमिताभ बच्चन 11 जुलाई से अस्पताल में भर्ती हैं।

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